Tuesday, January 22, 2008

प्रयाग प्रणाम


2 comments:

Batangad said...

क्या बात है। ये फोटोज देखकर मुझे 2000-2001 के महाकुंभ में अपनी रिपोर्टिंग की याद आ गई।

neeraj said...

इलाहाबादी कही भी रहे अपने रंग में रहता है। अपनी पहचाना बनाने को बेअबरू रहता है। फोटो के माध्यम से आप अपने हृदय के जो भाव प्रकट किये हो... वो अस्मरणीय है। बस लगे रहो इलाहाबादी...